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Movie Review: देशभक्ति और मर्दानी ताकत से भरपूर है फिल्म मणिकर्णिका, जानें

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फिल्म रिव्यु: मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ़ झांसी
कंगना रनौत की बहुत चर्चित फिल्म मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ़ झांसी शुक्रवार तारीख 25 दिसम्बर 2019 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म के मुख्य किरदार में कंगना रनौत, अतुल कुलकर्णी, अंकिता लोखंडे, डैनी डेंजोंगपा है। फिल्म की अवधि 2 घंटे और 28 मिनट है। फिल्म ऐतिहासिक किरदार झांसी की रानी लक्ष्मी बाई पर आधारित है। फिल्म का प्रकार ड्रामा, बायोग्राफी, एक्शन है।
फिल्म की कहानी: फिल्म की मुख्य कहानी सबको मालूम है। 'खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी' सुभद्रा कुमारी चौहान की इन पंक्तियो को कंगना रनौत ने फिल्म और रियल लाइफ में सार्थक कर के दिखाया है। फिल्म रिलीज से पहले ही अनगिनत विवादों से घिरी थी। उसके बावजूद कंगना रनौत ने फिल्म को ना सिर्फ पूरा किया पर रिलीज भी किया। फिल्म अमिताभ बच्चन के वॉइस ओवर के साथ शुरू होती है। 1828 में फिल्म ले जाती है। फिल्म की शुरुआत में मनु यानी मणिकर्णिका की एंट्री होती है। वह बहादुरी से शेर का शिकार करती है। बिठूर में पैदा हुई मनु को सुंदरता और बहादुरी जन्मजात मिली थी। राजगुरु की नजर उन पर पड़ती है और वह राजा गंगाधर राव के लिए उन्हें पसंद करते है। फिल्म में लक्ष्मी बाई की शौर्य गाथा को दिखाया गया है। गंगाधर राव की हत्या के बाद अंग्रेज झांसी कब्जा करना चाहते है। लक्ष्मीबाई भी मेरी झांसी नही दूंगी कर के अंग्रेजो के खिलाफ जंग छेड़ देती है। फिल्म की कहानी पूरी झांसी की रानी पर केंद्रित है।
फिल्म रिव्यु: फिल्म में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य को दिखाना था। और उन्होंने उसे बेहतरीन तरीके से दिखाया भी है। 1857 के आंदोलन को उतनी गहराई से नही दिखाया गया है। रानी और सर ह्यूरोज की सेना की लड़ाई रौंगटे खड़े कर देने वाली है। और बहादुरी से लड़ते हुए रानी अपने प्राणों की आहुति देती है वह देखने लायक है।

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फिल्म का निर्देशन राधा कृष्ण जगरलामुदी ने निभाया है पर मुख्यतः फिल्म को कंगना रनौत ने निर्देशित किया हुआ है। शुरुआत में फिल्म धीरे धीरे आगे बढ़ती है। किरदारों को सजाते हुए फिल्म आगे बढ़ती है। दूसरे हाफ में जैसे ही आंदोलन का ब्यूगल बजता है फिल्म भी गति पकड़ लेती है। फिल्म में एक्शन और रोमांच भर जाता है।
फिल्म में अंग्रेज सरकार के पहलू को ओर पॉवरफुल बनाया जा सकता था। कंगना ने फिल्म में पूरी जान लगा दी है। ऐतिहासिक फिल्मो को संजय लीला भंसाली और आशुतोष गोवारिकर के नजरिये से हमने देखा है पर कंगना ने सुंदरता और बहादुरी के नजरिए से फिल्म को चार चांद लगा दिए है। फिल्म में कई दृश्य और संवाद इतने जबरदस्त है कि तालियां बजने लगती है। प्रशुन जोशी के डायलॉग जोश भर देते है।
कंगना रनौत ने फिल्म के लिए एकदम धांसू एक्टिंग की है। लड़की के रूप में वह जितनी प्यारी और खूबसूरत नजर आई है उतनी ही खतरनाक वह रण भूमि में नजर आती है। कंगना ने अपने कैरियर का सबसे बेस्ट रोल यही निभाया है ये हम कह सकते है। दूसरे किरदारों ने भी अपना रोल बखूबी निभाया है। डैनी डेंजोंगपा काफी अरसे बाद नजर आए है। अंकिता लोखंडे का इस फिल्म से डेब्यू हुआ है। फिल्म का म्यूजिक शंकर एहसान लोय ने दिया है। फिल्म एक बार जरूर देखनी चाहिए।



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