फिल्म रिव्यु - सांड की आंख - 2019
तुषार हीरानंदानी की फिल्म सांड की आंख इस शुक्रवार तारीख 25 अक्टूबर 2019 को सिनेमाघरो में रिलीज हो गई है। फिल्म के मुख्य किरदार में भूमि पेडनेकर, तापसी पन्नू, प्रकाश झा, विनीत कुमार सिंह जैसे कलाकार मौजूद है। फिल्म का नाम सांड की आंख बुल्सआई पर से पड़ा है। फिल्म का प्रकार ड्रामा व बायोग्राफी है। फिल्म उन दो महिलाओं की कहानी है जो 60 साल की उम्र के बाद शूटिंग करना सीखती है और अपना और समाज का नाम रोशन करती है।
फिल्म की कहानी :- फिल्म की मुख्य कहानी में चंद्रो और प्रकाशी नामक दो महिलाओं की कहानी है। वो ऐसे समाज से आती है जहाँ पुरुष प्रधान रीती रिवाज है। फिल्म में भूमि और तापसी ने इन दोनों दादी का किरदार निभाया हुआ है। दोनों देवरानी और जेठानी होती है। चंद्रो को पता चलता है कि उनमें निशाना बनाने की कला है तो वह उसे शुरू कर देती है। प्रकाशी भी उनका साथ देती है। गांव के डॉक्टर उनको ट्रेनिंग देते है। जब दोनों ये काम करती है तो उनके जीवन में ढेर सारी तकलीफें आती है। घर के मर्द ही उनके खिलाफ होते है। गांव के लोग उन्हें रोकना भी चाहते है। पर इन सबसे आगे निकलते हुए वो एक साल में ही गोल्ड मैडल जीत लेती है और सबका मुह बंद कर देती है। ऐसी इंस्पिरेशनल स्टोरी है सांड की आंख।
रिव्यु:- फिल्म सांड की आँख समाज में चल रही महिला शशक्तिकरण को बढ़ावा देने की कहानी है। दो महिलाएं अपनी दिल की ख्वाहिश को पूरा करने के लिए जी जान लगा देती है। डायरेक्टर ने फिल्म के शुरुआत में गांव का बैकग्राउंड खड़ा किया है। फिल्म का पहला हाफ थोड़ा स्लो है पर दूसरा हाफ ट्विस्ट से भरपूर और मजेदार है। भूमि और तापसी दादी के रोल में धाकड़ नजर आती है। फिल्म के गाने पहली ही हिट हुए है। प्रकाश झा इस फिल्म में विलन बने हुए है। फिल्म में सबसे मजेदार हो तो वह भूमि और तापसी का प्रोथेस्टिक मेकअप है। फिल्म के डायलॉग्स ठीक ठाक है। फिल्म एक बार देख सकते है।





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